पिछले तीन वर्ष मे एक बहुत ही अजीब trend देखने को मिलता है हमारी कृषि और खाद्य सुरक्षा संबंधी (agriculture and food security) नीतियों मे, जो हमारे देश को एक बहुत ही भयावह संकट की ओर ले जा रहा है … और वो है सरकार की तरफ से आवश्यकता ना होते हुए कृषि उत्पादों के आयात (agricultural imports ) के लिए अत्यधिक प्रोत्साहन और इसके लिए बेहद खतरनाक नीतियों का निरूपण …

भारतीय किसानों के लिए खलनायक बनी भारत सरकार
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पिछले कुछ सालों मे कई प्रमुख कृषि एवं खाद्यान्न उत्पादों के आयात मे चौकाने वाली बढ़ोतरी दर्ज की गई … जैसे गेहूँ, मक्का, चावल, दालें, edible oil(खाने योग्य तेल) और शक्कर…

2014 से 2017 के बीच आयात होने वाले गेहूं, चावल और मक्का की मात्रा ( by volume ) मे 110 गुना की बढ़ोतरी देखी गई ! इसकी वजह से इन उत्पादों के घरेलू दामों मे गिरावट आई जिसका सीधा नुकसान हमारे घरेलू किसानो को उठाना पड़ा …

हमारे घरेलू बाजार किसानों को उनके उत्पादों की उचित कीमत नही दे पा रहे हैं … व्यापारियों को घरेलू किसानों से ये उत्पाद खरीदने की बजाए australia से import करना ज्यादा सस्ता लग रहा है, इसका कारण है योजनाबद्ध तरीके से लागू की गईं सरकारी नीतियां …

कुछ data देखने पर इस बात की गंभीरता का पता चलेगा… 2014-15 मे हम 134 करोड़ रुपये का अनाज import करते थे जो 2016-17 मे 9009 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है … लगभग 6620% की बढ़ोतरी !!

फलों और सब्जियों मे ये आंकड़ा 5414 करोड़ रुपये (2014-15) से बढ़कर 5897 करोड़ रुपये (2016-17) तक पहुंच गया है … इसके सामने हमारे agri exports पर सरकारी दवाब देखने को मिलता है … हमारे agri exports 2014-15 मे 1.35 लाख करोड़ से घटकर 2015-16 मे 1.08 लाख करोड़ पर पहुंच गया …

किसानों के लिए खलनायक बनी भारत सरकार
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ये भी देखा गया की सरकार द्वारा public distribution system (PDS) के लिए गेहूं की खरीद मे भी 3-4 मिलियन टन की गिरावट हुई … गेहूं के बंपर उत्पादन के बावजूद गेहूं पर आयात शुल्क ( import duty ) september 2016 मे 25% से घटाकर 10% कर दी गई और दिसंबर तक इस आयात शुल्क को पूरू तरह खत्म कर दिया गया ( 0% ) !! Food corporation of India (FCI) के अनुसार गेंहु के सरकारी भंडारण ( government storage ) की मात्रा 2016-17 मे अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है… जनवरी 1 मे ये मात्रा 1.38 मिलियन टन थी ( जो सरकारी भंडारण का minimum buffer stock निर्धारित किया गया गया है) जबकि पिछले साल ये 2.4 मिलियन टन थी … आज हम Australia, Ukraine और France से 5.75 मिलियन टन गेहूं आयात कर रहे हैं !

सरकार food inflation से लड़ने के लिए imports का सहारा लेती है, लेकिन ये नीति घरेलू किसानों के लिए खतरनाक है खासकर तब जब हम घरेलू स्तर पर ही बंपर उत्पादन कर रहे हों, क्योंकि इस सूरत मे किसानो को अपने उत्पादों की उचित कीमत नही मिल पाती … ये फिर हमारे घरेलू किसानो को हतोत्साहित करने का काम करता है, उन्हे आगे चलकर बंपर उत्पादन करने से रोकता है …

0% import duty के कारण विदेशी imported गेहूं भारत के घरेलू बाजारों मे बहुत सस्ता बिकता है… दक्षिण भारत मे उत्तर भारत के गेहूं की मांग imported गेहूं की मांग के मुकाबले कम हो रही है… कारण, विदेशी गेहूं हमारे घरेलू उत्पाद से 10-15% सस्ता बिक पा रहा है … ये उसी दौर की याद दिलाता है जब अमेरिका का सस्ता PL480 गेहूं हमारे घरेलू उत्पाद को आहत कर रहा था …

सत्ता मे आने के बाद NDA सरकार ने राज्य सरकारों को MSP से ऊपर गेंहु खरीदने से रोका…इस कारण सरकारी भंडारण मे गेंहु की कमी है …

2008-09 मे हमारे agri imports सिर्फ 29000 करोड़ रुपये के थे जो 2014-15 तक 1.21 लाख करोड़ रुपये और 2015-16 तक 1.40 लाख करोड़ हो गया … ये पैसा हमारे घरेलू किसानो के पास जाना चाहिए था …

भारतीय किसानों के लिए खलनायक बनी भारत सरकार
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शक्कर की भी यही कहानी… पिछले 6 सालों मे शक्कर का उत्पादन भारत मे शक्कर की कुल खपत से ज्यादा हुआ … इसके बावजूद सरकार ने 2012-14 मे 0.77 मिलियन टन शक्कार का import किया, जिसके कारण शक्कर के दामों मे भारी गिरावट आई , नतीजन शक्कर मिलों के पास पैसों की कमी हुई और वो किसानो की पूरी payment नही कर पाए… मिलों पर किसानो के 22000 करोड़ रुपये बकाया हैं…

भारत edible oil और दालों का import करने मे भी बहुत आगे निकल गया है … 1993-94 मे भारत मे edible oil की कुल खपत का सिर्फ 3% हम import करते थे , आज 70% से ज्यादा करते है, मतलब 70000 करोड़ से ज्यादा का import … हमारे घरेलू बाजार आयात किए हुए सस्ते palm oil और soyabean oil से भर चुके हैं … crude and refined palm oil पर import duty 5% घटा दी गई, नतीजन हमारे मूंगफली और सोयाबीन किसानो की फसलें MSP से कम दामो पर बिकना चालू हो गईं हैं …

दालों के उत्पादों की भी outsourcing कर दी गई है … Mozambique मे किसानो को दाल उत्पादन करने के लिए सहायता की जा रही है, और उचित मूल्य पर भारत द्वारा खरीदने का वादा है…MoU sign हो चुके हैं जो 100000 टन दालों का import भारत करेगा, आगे चलकर ये 200000 टन हो जाएगा … हम साल मे 20000 करोड़ की दालें import कर रहे हैं , पिछले दशक से तीन गुना ज्यादा … mozambique को दी जाने वाली सुविधाएं भारत के किसानो को देने मे क्या बुराई थी ??

2008- 09 मे जहां विश्व food crisis से गुजर रहा था तब भारत पर इसका कुछ असर नही हुआ था, कारण था हमारी कृषि उत्पादन और भंडारण मे आत्मनिर्भरता … हमारे देश मे 650 मिलियन किसानो की विशाल सेना है … production by masses हमे एक food bowl बना सकता है … हम production outsourcing और corporate mass production के लिए नीतियां बनाकर किसका भला कर रहे हैं, किसानों को हमारे देश मे liability समझा जाता है , इन्हे asset कब समझा जाएगा ???

Source : Divyanshu Tiwari