आतंकवाद के जन्म और उसके पोषण के लिए अमेरिका एवं ज्यादातर देश इस्लाम और उसकी नीतियों को दोषी मानते है. चूँकि जो आतंकवादी दुनियाभर में खून बहाते हैं (अब उनका मकसद चाहे जो भी हो) वो प्रायः इस्लाम के अनुयायी ही होते हैं. हालाँकि काफी हद तक यह सत्य भी है कि आतंकवाद के आका और उनके लड़ाके इस्लाम से ही संबंध रखते हैं और इस्लाम की आड़ में ही काम करते हैं लेकिन बात मात्र इतने से नहीं खत्म हो जाती. आतंकवाद मात्र किसी धर्म और उसकी शिक्षाओं से नहीं चल सकता उसके लिए बड़ी मात्र में साधन और योजनायें चाहिए होती हैं जो कि किसी बड़ी कंपनी की तरह ही कार्य करें.

अमेरिका का बुक्का कैंप और बगदादी, कुछ यूँ हुआ था ISIS का जन्म
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हम यहाँ बात कर रहे वर्तमान में दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन माने जाने वाले इस्लामिक स्टेट (ISIS) और उसके आका अबू बकर अल बगदादी की. अगर विदेशी मीडिया रिपोर्टों की बातों पर विश्वास किया जाय तो इस आतंकी संगठन की नींव ईराक में स्थित अमेरिकी सेना के ‘बुक्का कैंप’ में पड़ी थी. बुक्का कैंप के पूर्व गार्ड मिचेल ग्रे से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, ईराक में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अमेरिकी सेना ने अबु बक्र अल बगदादी समेत कई खूंखार कट्टरपंथियों को हिरासत में लिया था. इन्हें उम कसर नामक इलाके में बनी अमेरिकी जेल ‘बुक्का कैंप’ में रखा गया था.

मिचेल ग्रे की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि के लिए काफी है कि, बगदादी का अमेरिका से पुराना संबंध है चाहे वो उनके कैदी के रूप में ही क्यों ना रहा हो. कुछ ऐसी ही स्क्रिप्ट थी अफगानिस्तान में लड़ने वाले मुजाहिदीन ओसामा बिन लादेन की जिसने अमेरिका की तरफ से अफगान में रूस के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और बाद में वह अलकायदा नामक आतंकी संगठन बनाकर उसका मुखिया बन गया. यह बात किसी से छुपी नहीं है कि, लादेन जो भी बना था वह अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के सहयोग से ही बना था.

इसी तरह यह भी संभव है कि, बुक्का कैंप में रहते हुए ही बगदादी एवं अन्य खूंखार कट्टरपंथियों को ट्रेनिंग दी गयी थी और इन्हें सीरिया-ईराक में तबाही फ़ैलाने के लिए तैयार किया गया था. यहीं से निकलने के पश्चात् ही इस्लामिक स्टेट का जन्म हुआ था. इस्लामिक स्टेट जैसा बेहद संगठित एवं साधन संपन्न आतंकी संगठन बिना अमेरिका एवं सऊदी जैसे देशों की सहायता के कभी नहीं तैयार हो सकता था. दुनियाभर के कई विश्लेषक दबी जुबान में इस्लामिक स्टेट के पीछे अमेरिका का हाथ होने की बात स्वीकारते रहे हैं लेकिन उन्होंने यह खुलकर कहने की हिम्मत कभी नहीं की.

अमेरिका का बुक्का कैंप और बगदादी, कुछ यूँ हुआ था ISIS का जन्म
बुक्का कैंप, ईराक Source

इस्लामिक स्टेट वर्तमान में दुनिया का सबसे अमीर आतंकी संगठन है जिसके पास अरबों की संपत्ति है और ऐसा आतंकी संगठन भी सिर्फ वही चला सकता है जिसके पास अकूत धन हो. इस्लामिक स्टेट के पास सिर्फ धन ही नहीं बल्कि बड़ी मात्र में ऐसे आधुनिक हथियार तथा टोयोटा हायलेक्स एवं लैंड क्रूजर जैसे महंगे वाहन हैं जो कि सिर्फ पैसेवाले लोगों के पास ही हुआ करते हैं. एक आतंकी संगठन जिसके खिलाफ अमेरिका रूस और पश्चिमी शक्तियों ने युद्ध छेड़ रखा हो और आये दिन बम गिराए जाते हों वह फिर भी दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है यह बिना किसी बाहरी शक्ति के साथ दिए संभव नहीं लगता.

हालाँकि अमेरिका, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देश खुलकर सीरिया के विद्रोहियों को हथियार एवं जरूरी सहायता उपलब्ध करवाने की बात स्वीकारते हैं लेकिन फिर भी कोई देश अमेरिका को कटघरे में लाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता और ना ही हथियार कंपनियों और हथियार सप्लायर देशों को मानवाधिकारों का भाषण पिला पाता है. हंसते खेलते ईराक को बर्बाद करने पर भी अमेरिका से शायद ही यूएन या किसी देश ने सवाल-जवाब किये हों. इसी तरह लीबिया में भी मुअम्मार गद्दाफी की लोकप्रिय सरकार को अमेरिका समर्थित आतंकवादियों ने (जिन्हें विद्रोही का अनाम दिया गया था) ना ही मात्र उखाड़ फेंका बल्कि लीबिया को वर्षों पीछे धकेल दिया.

यह भी किसी से नहीं छुपा है कि इस्लामिक स्टेट जो तेल की तस्करी करता है उसे अमेरिका के सहयोगी देश ही खरीदते हैं. कई मीडिया रिपोर्टों में भी साबित हो चुका है कि, अमेरिकन कंपनियां ही इस्लामिक स्टेट आतंकियों को हथियार और आधुनिक तकनीकि से बने वाहन उपलब्ध करवाती हैं. सीरिया में जिन लोगों को अमेरिका, सऊदी और इस्लामी शक्तियाँ विद्रोही कहकर मदद और हथियार उपलब्ध करा रही हैं वो कोई और नहीं बल्कि खूंखार आतंकी ही हैं जिन्हें अमेरिका ने बशर अल असद को सत्ता से उखाड़ने के लिए तैयार किया था. वो तो रूस के सहयोग और सीरियाई सेना के साथ हे असद का पराक्रम है जिसने अबतक सीरिया को बचाए रखा है वरना अबतक सीरिया भी लीबिया-ईराक बना चुका होता.