Solar City, Space X जैसी कंपनियों के CEOs का कहना है कि Automation से यदि इंसानों की नौकरियां छीन जाती है, तो रोबोट्स द्वारा किये गए धनोपार्जन को GDP को राष्ट्र की जनसँख्या के बराबर बाँट देना चाहिए। Automation को लेकर सबसे बड़ा पेंच Purchasing Power को लेकर फँसता है। आइये हम इस Purchasing Power को समझने का प्रयास करते है।

Purchasing Power (क्रय शक्ति)

पैसे के एक Unit के बदले में प्राप्त होनेवाले चीज वस्तु और सेवाओं (Goods & Services) के प्रमाण को क्रय शक्ति कहते है। क्रय शक्ति का आधार पूरी तरह Price Level पर होता है। प्राइस लेवल जितना ज्यादा रहेगा, क्रय शक्ति उतनी ही कम हो जायेगी। और प्राइस लेवल जितना कम रहेगा, क्रय शक्ति उतनी ही बढ़ जायेगी। क्रय शक्ति भी वेतन से सम्बन्ध रखती है। आईए हम अब वेतन के बारे में जानने का प्रयास करते है।

वेतन (Wages)

वेतन उसे कहा जाता है जिसे व्यक्ति को उसके द्वारा दी गई सेवा के बदले में पैसो के रूप में दिया जाता है। वेतन के भी दो प्रकार होते है। पहला Money Wages(धन के रूप में मिलनेवाला वेतन) और दूसरा Real Wages (वास्तविक वेतन)

महीने के अंत में पगार के तौर पर मिलनेवाले वेतन को Money Wages कहा जाता है। लेकिन इसका कोई महत्व नही है। वास्तविक वेतन का सर्वाधिक महत्व होता है। क्योंकि उससे ही आपकी क्रय शक्ति का निर्धारण होता है।

आप अक्सर बड़े बुजुर्गों से सुनते होंगे की हमारे ज़माने में 10 रूपए में 10 किलो चावल, 10 किलो दाल वैगरह मिलता था। लेकिन आज अच्छे ब्रांड की चॉकलेट भी 10 रूपये में नही मिलेगी। रूपये की नोट तो दस रुपए ही है, RBI द्वारा issue की हुई फिर भी उस ज़माने में 10 रूपये में 10 किलो चावल मिलता था लेकिन आज 10 रुपए में पाव किलो चावल भी नही मिलता। यही है रूपये का वास्तविक मूल्य। पहले आप 10 रूपये में 10 kg चावल खरीद सकते थे लेकिन आज उसी 10 रूपये से पाव किलो चावल भी नही मिलेंगे। यहाँ रूपये की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हुई ऐसा कह सकते है। अब आते है Automation पर।

रोबोट्स का बढ़ता प्रयोग कहाँ ले जायेगा दुनिया को ?
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इस विषय पर Ford के संस्थापक Henry Ford और Workers Union Leader Walter Reuther के बीच का Conversation काफी प्रसिद्ध है। एक बार Henry Ford वाल्टर रयूथेर को एक Automated Assembly Line में गये। वहां हेनरी फोर्ड ने W Reuther से पूछा की ” Engineers और Labours के जगह पर बिना वेतन मोटर कार्स बना रहे यह रोबोट्स क्या आपके Union की Annual Fees भरेंगे?? ” Reply में W Reuther ने कहा कि “आपके रोबोट्स द्वारा बनाई हुई कारों को वेतन-रहित लोग किन पैसो से खरीदेंगे?? ”

यह छोटा सा Conversation अर्थशास्त्र में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि यहाँ अर्थशास्त्र vs विज्ञान वाली बात हो गई है। बिना वेतन के लोग अपना जीवन निर्वाह कैसे करेंगे?? इसका भी उपाय खोज लिया गया है वह है UBI

UBI क्या है

Universal Basic Income एक ऐसा कांसेप्ट है जिसमे Automation के कारण बेरोजगार हुए प्रत्येक नागरिक को काम और वेतन के अभाव में हर महीने एक Fixed Amount नागरिकों को दिया जायेगा। Elon Musk का भी ऐसा ही विचार है कि रोबोट्स द्वारा अर्जित GDP को नागरिकों में बाँट देना चाहिए। अमेरिका , कनाडा के कई शहरों में #UBI का प्रयोग चल रहा है। पिछले वर्ष #Switzerland की जनता ने एक जनमत संग्रह में UBI के प्रस्ताव को 80% की बहुमति से खारिज कर दिया था। भारत में भी पिछले दिनों UBI को लेकर चर्चाएं हुई थी। अब इस Automated युग में मानव सभ्यता का भविष्य क्या होता है यह एक रोचक प्रश्न बन गया है।

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