आजकल दुनिया में जिन देशों की करीबियां सबसे ज्यादा चर्चा का विषय हैं उनमें से एक महत्त्वपूर्ण मैत्री चीन-पाकिस्तान की है. दोनों ही आजकल एक दूसरे के बेहद करीब हैं. चीन पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है जिसके चलते पाकिस्तानी राजनीतिज्ञों की बांछें खिली हुयी हैं.

पाकिस्तान में डरे हुए क्यों हैं चीनी ?
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पाकिस्तान के चीन से मित्रता होने के लिए एक और बड़ा कारण है भारत का विरोध. पाकिस्तानी नेताओं को लगता है कि, वह चीन से करीबी बढ़ाकर भारत पर दबाव बढ़ा सकते है. चूँकि चीन भारत से साठ के दशक में युद्ध कर चुका है और वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की प्रतिद्विन्द्ता जगजाहिर है. पाकिस्तान इसी का फायदा उठाना चाहता है.

यह सब होते हुए भी चीन-पाकिस्तान दोस्ती में कई सारे पेंच हैं जिसे खुद पाकिस्तानी भी नहीं नजरंदाज कर सकते. पाकिस्तानी नेताओं ने चीन से मित्रता जरुर बढ़ा ली है लेकिन पाकिस्तानी आवाम ने भी चीनियों को स्वीकार कर लिया है, ऐसा नहीं है.

पाकिस्तान में चीनियों की हत्या इस बात का सबूत है कि, पाकिस्तानी चीनियों से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. खासकर पाकिस्तान का व्यापारी वर्ग, जिसे यह डर है कि, अगर चीनियों का पाकिस्तान में ऐसे ही दखल बढ़ता रहा तो एक दिन वह उनका बिजनेस कब्ज़ा लेंगे.

पाकिस्तान के व्यापारी वर्ग का ये डर जायज भी है. जब से चीन व्यापारिक रूप से उभरा है, ऐसा उदाहरण लगभग हर उस देश में देखने को मिल रहा है जहाँ चीनियों ने पैर पसारे हैं. चीनी व्यापारी व्यापार कुशल तो हैं साथ ही बेहद आक्रामक व्यापारी भी जो अपना व्यापार स्थापित करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

इसमें दो समीकरण काम करते हैं. एक चीनियों द्वारा बनाये जाने वाले सामानों का सस्ता होना दूसरी चीनियों द्वारा अपना माल दूसरे देशों में खपत करने की शक्ति. पाकिस्तान का व्यापारी वर्ग हो या किसी और देश का हर कोई यह अच्छे से जानता है कि, लोग वही सामान खरीदना पसंद करेंगे जो कि सस्ता और अच्छा होगा.

भारत खुद भी इसका उदाहरण हैं जहाँ के मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को चीनियों ने लगभग तबाह कर दिया है. छोटी-छोटी कीलों से लेकर बड़ी-बड़ी मशीनों तक हर चीज भारत में चीन से आती है. चीनियों ने भारत में बिना किसी दखल के अगर उनका बाजार कब्जा लिया तो पाकिस्तान में आकर वो क्या-क्या करेंगे. इस बात से पाकिस्तानी बेहद अच्छी तरह परिचित हैं.

हाल ही में कराची में हुए एक चीनी बिजनेसमैन की हत्या इस बात का सबूत है कि, चीनियों को सिर्फ पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ और पाक आर्मी ही पसंद करती है पाकिस्तानी आवाम नहीं. पाकिस्तानी चीनियों के हाथों अपना व्यापार नहीं तबाह होने देना चाहते. चीनी नागरिक की हत्या किसलिए हुयी अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है लेकिन अनुमान यही लगाया जा रहा है यह हत्या चीनियों के लिए एक संदेश थी.

चीन ने पहले ही अपने नागरिकों को एक एडवाइजरी जारी कर रखी है कि, वह पाकिस्तान की यात्रा करते वक्त सावधान रहें. यही नहीं चीन ने अपने नागरिकों को चेता दिया है कि, आने वाले समय में पाकिस्तान में उनकी हत्या बढ़ सकती है. इन सब बातों ने चीनियों को पाकिस्तान में भयाक्रांत किया हुआ है.

अपने देश में होने वाली हत्याओं को लेकर पाकिस्तानी हमेशा की तरह उसका आरोप भारत अमेरिका या इजराइल पर मढ़ सकते हैं लेकिन यह एक तथ्य है कि, पाकिस्तानी आवाम को चीनी बिलकुल नहीं पसंद आ रहे. पाकिस्तान को चीन का सपोर्ट चाहिए लेकिन चीनी नहीं.

पाकिस्तान में एक वर्ग ऐसा भी है चीन को अपने देश में ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह देखता है जिसने व्यापार के बहाने उनका देश (उस समय भारत) कब्ज़ा लिया था. ऐसे पाकिस्तानियों के ब्लॉग सोशल मीडिया पर पढ़े जा सकते हैं. कुछ पाकिस्तानी नेताओं ने भी इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है.

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