जैसा कि पिछले लेख में बताया गया था, जब इटली के फ्लोरेंस शहर से यूरोप में पुनर्जागरण काल (Renaissence) की शुरुआत हुयी तो यूरोप में तेजी से उत्पादन कार्य व उपभोक्तावाद बढ़ा, जिस कारण ‘बैंकों’ का कारोबार भी तेजी से बढा, शुरू शुरू में पहले तो बैंक कारोबार मुख्यतः ‘यहूदी सेठ’ ही किया करते थे लेकिन बाद में इस व्यवसाय में भारी लाभ के चलते व यहूदियों की देखी देखा कई इटैलियन व अन्य यूरोपीय देशों के व्यापारियों ने भी जगह-जगह अपने बैंक खोलना शुरू कर दिए, लेकिन उनमें जो सबसे प्रमुख नाम उभर के सामने आया वो था फ्लोरेंस के ‘डे मेडिसी फैमिली’ (De Medici Family) का.

De Medici Family : Rothschild से पहले इस बैंकर परिवार का था यूरोप पर कब्जा
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‘डे मेडिसी फैमिली’ को इटली के छोटे-बड़े सभी यहूदी बैंकरों का समर्थन प्राप्त था जिस कारण बड़ी तेजी से उनका कारोबार फैला. डे मेडिसी फैमिली का बैंक कारोबार पुनर्जागरण काल के केंद्र रहे इटली के फ्लोरेंस नगर में जमकर फला फूला और उनके बैंकों का फ्लोरेंस नगर के अलावा मिलान, नेपल्स, वेनिस, जिनेवा, ल्योंस, ब्र्युगेस, लंदन जैसे लगभग हर यूरोपीय शहर में तेजी से विस्तार भी हुआ.

बैंकिंग कारोबार के इतिहास में एक दिन ऐसा भी आया जब ‘डे मेडिसी परिवार’ ना ही मात्र इटली का बल्कि “पूरे यूरोप का सबसे अमीर व ताकतवर परिवार” बन गया और सदियों तक बना रहा. 14वी शताब्दी से लेकर लगभग 16वी शताब्दी तक डे मेडिसी बैंक यूरोप का सबसे ताकतवर बैंक भी बना रहा.

चूँकि ये बैंकर परिवारों की रेस सत्ता व ताकत प्राप्ति के लिए ही थी जिस कारण जैसे ही ‘डे मेडिसी परिवार’ यूरोप में सबसे ताकतवर परिवार के रूप में उभरा उन्होंने फ्लोरेंस व इटली की सत्ता हथिया ली. कहा जाता है उस समय इटैलियन सत्ता डे मेडिसी बैंकर परिवार की गुलाम हुआ करती थी.

यहाँ तक कि, ईसाईयों के सबसे पवित्र स्थान वेटिकन पर भी मेडिसी परिवार का प्रभुत्त्व स्थापित हो गया था. ईसाईयत पर इस परिवार का कई सदियों तक प्रभाव रहा था. डे मेडिसी परिवार से ही चार सदस्य वेटिकन में पोप नियुक्त किये गये थे, जो इस प्रकार हैं :

1. पोप ल्यु दसवें Pope Leo X (1513-1521)

2. पोप क्लीमेंट Pope Clement (1523-1534)

3. पोप पियस चौथे Pope Pius 4 (1559-1565)

4. पोप ल्यु ग्यारहवें Pope Leo XI (1605)

इटली में फ्लोरेंस राजघराने व वेटिकन के पोप की सत्ता कब्जाने के बाद डे मेडिसी परिवार का निशाना थे यूरोप के राजघराने जैसे फ़्रांस, स्पेन, ब्रिटेन व डच, इन सब राजघरानों पर अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए मेडिसी परिवार ने इनसे व्यापार बढ़ाने के साथ ही वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किये.

इन देशों के राजघरानों में मेडिसी फैमिली ने अपनी पुत्रियाँ ब्याहकर सफलतापूर्वक अपना प्रभाव स्थापित कर लिया और मेडिसी परिवार के खून से निकली संतानों व फिर उनकी संतानों का झुकाव भी पूर्णतया डे मेडिसी बैंकर परिवार के प्रति ही रहा जिस कारण लगभग 16 वी शताब्दी तक पूरे यूरोप में मेडिसी परिवार की सत्ता कायम रही.

यह वह समय था जब यूरोप में बैंकिंग कारोबार चरम पर था और कई बैंकों की स्थापना हुयी. पुर्तगाल, स्पेन, डच, ब्रिटेन व जितने भी यूरोपीय राजघरानों ने भारत, अफ्रीका, चीन सहित कई देशों में लूट व साम्राज्यवाद की शुरुआत की वो वास्तव में डे मेडिसी परिवार के समय ही अस्तित्व में आये जो संभवतः इन्ही बैंकर परिवारों के आदेशों पर ही हुआ था. जिनका सपना पूरी धरती पर राज करने का था.

कई सदियों तक यूरोप पर राज करने वाले डे मेडिसी बैंकर परिवार की जगह 17 वीं शताब्दी आते आते Rothschild Family ने ले ली जो कि आज भी धरती के ना ही मात्र सबसे ताकतवर बैंकर परिवार हैं बल्कि धरती के एक बड़े हिस्से पर राज करते हैं. दुनिया की ज्यादातर खनिज खदानें, सेंट्रल बैंक और सोने-हीरे की कंपनियां Rothschild की ही हैं.