Dark History Of DuPont : अपनी सम्पन्नता व अध्यात्म के अनूठे आकर्षण के चलते हमारा भारतवर्ष हमेशा से ही धरती के सबसे दिलचस्प स्थानों में से एक रहा है. जिस तरह आज लोग जीवन में एक बार लन्दन-पेरिस घूमना चाहते है इसी प्रकार कुछ सदी पहले तक दूर-दराज के देशों के निवासियों की ये दिली-इच्छा  होती थी कि अपने जीवन में कम से कम वह एक बार भारत भ्रमण जरुर करें. पर अब ऐसा नही रहा, इतिहास गवाह है अपने जिस व्यवहार और आकर्षण के कारण भारत दुनियाभर के लोगों को आकर्षित करता था उसके उसी गुण ने इस राष्ट्र का गला घोंट दिया और आज भी वही लगातार वही क्रियाकलाप चल रहा है. जिस प्रकार सोना-हीरा जैसे अमूल्य धातुओं का कोई मित्र नही होता उसे जो देखेगा वही लूट लेना चाहेगा इसी तरह हमारा भारत था और है. इतिहास गवाह रहा है इस धरती पर जिसकी भी नजर पड़ती थी वो किसी भी तरह इसे लूट लेना चाहता था.

बारूद, बम और जहर बनाने वाली कंपनी अब भारतीयों को भोजन देगी Dupont
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आज भी वही है पर जिस तरह दुनिया आधुनिक होती गयी इसी तरह लूट मार के तरीके भी आधुनिक हो गये हैं. यहाँ पर हमारा इशारा भारतवर्ष में लगातार पैर पसारती खूंखार विदेशी कम्पनियों से है, जिनकी नजर आज दुनिया का सबसे बड़ा बाजार माने जाने वाले देशों में से एक हमारे भारतवर्ष पर है. पहले जब विदेश आक्रमणकारी भारत आते थे तो वो मारकाट कर लूट मचाते थे पर ये इस आधुनिक जमाने का कमाल देखिये आजकल विदेशी कंपनियां भारतीयों को खिला पिलाकर प्रेम से लूट रही हैं और मार रही हैं पर भारतीय उफ्फ तक नहीं कर रहे. हमारे देश में ऐसी कम्पनियां की आज बाढ़ सी आ गयी है जो कि किसी महामारी से कम नही हैं. वैसे तो भारत में काम करने वाली मोनसैंटो, बायर, जॉनसन एंड जॉनसन, हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड, प्रोक्टर एंड गैम्बल, पेप्सिको, कोकाकोला व नेस्ले जैसी कई खूंखार कंपनियां हैं जिनमें से ज्यादातर का नाम तो आपने कभी ना कभी सुना ही होगा लेकिन भारत में अब कुछ ऐसी कंपनियां भी पैर पसार रही हैं जिनका मुख्य काम दुनिया को किस तरह तबाह किया जाय इसका व्यापार करना रहा है.

यहाँ हम बात कर रहे हैं अमेरिका की प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी DuPont की. इस कम्पनी का काम जहाँ पहले लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मारने के लिए गोला-बारूद व विस्फोटक तैयार करना था वही अब जमाने के हिसाब से इसने भी अपना धंधा थोडा बदल सा लिया है. अब ये हथियार के साथ ही साथ बेहद ही आधुनिक तरीके से मनुष्यों को मारने के लिए ऐसे प्रोडक्ट्स (जैविक हथियार-Bio Weapons) तैयार करते हैं जिससे उन्हें बीमार कर व सड़ा गलाकर नष्ट किया जा सके, इनका लक्ष्य ना ही मात्र मनुष्यों को मारना है बल्कि प्रकृति और पर्यावरण का भी विनाश करना है. जिस कारण हम ऐसी कम्पनियों को दानव कम्पनियों के नाम से संबोधित करते हैं. Monsanto और Bayer के जैसी विदेशी कंपनियों के बाद अब भारतीय कृषि क्षेत्र में DuPont ने भी अपने पाँव तेजी से पसारने शुरू कर दिए हैं.

बारूद, बम और जहर बनाने वाली कंपनी अब भारतीयों को भोजन देगी Dupont
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इंटरनेट से प्राप्त जानकारियों के अनुसार, इस कम्पनी की स्थापना अमेरिका के डेलावेयर में सन 1802 में एक फ्रेंच अमेरिकन केमिस्ट Eleuthere Irenee Du Pont ने की थी. इस कंपनी का मुख्य कार्य बारूद बनाना और उसकी सप्लाई करना हुआ करता था. इन्होने अपने काम की शुरुआत ही खतरनाक इरादों के साथ की थी. एक समय Duont ना ही मात्र अमेरिका की बल्कि दुनिया की सबसे ज्यादा बारूद और विस्फोटक तैयार करने वाली कंपनी थी. अगर अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा सप्लायर देश बना तो उसमें Dupont कंपनी का अभूतपूर्व योगदान था.

दिलचस्प बात ये हैं कि DuPont कम्पनी का भारत से पुराना नाता रहा है (लगभग स्थापना के समय से ही) क्योंकि उस समय भारतीय बारूद और विस्फोटक बनाने में महारत हासिल कर चुके थे. जिस कारण DuPont जैसी कंपनियां अपनी शुरुआत में बारूद और विस्फोटक पदार्थ भारत से ही आयात किया करती थीं. उस समय सबसे उच्च क्वालिटी के हथियार चाहे तलवारें हों या गोला-बारूद ये भारतीय ही तैयार करते थे. DuPont India की वेबसाइट के अनुसार कंपनी ने बारूद का आयात भारत से सन 1802 से ही शुरू कर दिया था. Dupont का सबसे पहला प्रोडक्ट मानवता के विनाश के लिए था वो भी आज के दो सौ साल पहले तो आप अंदाजा लगा सकते है वर्तमान में इनका काम क्या होगा ?

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अब DUPont बदलते जमाने के साथ आधुनिक हो गये है अब ये विस्फोटक बारूद जैसे पुराने व पारम्परिक हथियारों के बजाय उससे भी कई गुना खतरनाक हथियार ‘जैविक हथियार’ (Bio Weapons) बनाते हैं. लंबे समय तक DuPont ने क्लोरो फ्लोरो कार्बन्स गैसों (CFC Gases) का निर्माण किया. रसायन (Chemistry) के विद्यार्थी जरुरु जानते होंगे आखिर ये CFC गैस किस जहर का नाम है. ये वही गैस है जो रेफ्रिजरेशन में प्रयुक्त होती है एवं वायुमंडल की ओजोन परत को छतिग्रस्त करने में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है. लेकिन जब दुनिया भर में ओजोन परत के पतले होने के कारण विवाद बढ़ा तो DuPont ने उसका निर्माण रोक दिया और उसकी जगह कम हानिकारक (उनकी नजर में) HCFC (हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो) गैस का निर्माण शुरू कर दिया जिसका इस्तेमाल आज भी रेफ्रिजरेशन के लिए होता है लेकिन वास्तव में ये गैस भी पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिए उतनी ही खतरनाक है जितनी की वो पुरानी CFC थी. DuPont इन जहरीली गैसों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है.

DuPont अमेरिका की उन सैकड़ों कम्पनियों में से एक है जिसने विस्फोटक बारूद व हथियार की द्वितीय विश्वयुद्ध में जमकर सप्लाई की थी और अरबों रूपये कमाए थे. यह उन कम्पनियों की लिस्ट United States Corporations in The Value of Wartime Productions Contract में 15 वें स्थान पर रही थी जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में जमकर माल बनाये थे. अमेरिका ने धरती के सबसे विनाशकारी हथियार माने जाने वाले जिस हाइड्रोजन बम का आविष्कार करने की कोशिश की थी उसके लिए भी साऊथ कैरोलिना में Savnnah River Plant नामक रिसर्च लैबोरेटरी को DuPont ने ही बनाकर दिया था.

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आज DuPont का मुख्य काम दुनिया भर में GMO बीजों को बढ़ावा देना है. जिससे पहले ये GMO फूड्स खिलाकर लोगों को बीमार करते है व कैंसर जैसे खतरनाक रोग पैदा करते हैं फिर असाध्य बीमारियाँ फैलाकर अपना दवा बाजार खड़ा करते हैं. अर्थात् ये कंपनियां दोनों तरफ से चांदी काटती हैं और मोहरे बनते हैं इन कंपनियों से अनजान लोग. आने वाले समय में DuPont जैसी कंपनियों का भारत में तेजी से कारोबार बढ़ने वाला है क्यों भारत सरकार GMO बीजों व विदेशी कम्पनियों के प्रति नर्म दिखाई दे रही हैं. सरकार के लिए ये विदेशी निवेश के अंतर्गत आ जाता है जिसे वे अपनी सफलता मानकर चलती हैं.

Sharon Lerner नामक शोधार्थी जो की पर्यावरण संबंधी अपराधों को कवर करती हैं उन्होंने ‘द इंटरसेप्ट’ नामक वेबसाइट पर लिखे गये अपने लेख में DuPont के ऐसे ही काले कारनामों का खुलासा किया है. DuPont कृषि के क्षेत्र में अभी भारत में अपने पैर जमा रही है लेकिन इसके दुष्प्रभावों से अमेरिकी काफी पहले से परिचित हैं इसीलिये वहां कई बार इस कंपनी को विरोध भी झेलना पड़ा है लेकिन DuPont पर कभी लगाम नहीं लग पायी क्योंकि यह कंपनी एक ऐसे परिवार की कंपनी है जिसका अमेरिका के निर्माण में काफी योगदान रहा है. DuPont परिवार पिछले दो सदी से अमेरिका के सबसे संपन्न एवं धनाढ्य परिवारों में से रहा है. इस परिवार से अमेरिका के कई राजनीतिक एवं औद्दोगिक परिवार संबंधित रहे हैं. अमेरिका के कई पूर्व राष्ट्रपति DuPont परिवार के रिश्ते-नातेदारों में से आते हैं. अमेरिका के ओहियो और साउथ वर्जीनिया के कई निवासियो ने इस कम्पनी को कैंसर और अन्य असाध्य रोग पैदा करने के लिए अमेरिकी अदालतों में मुकदमा भी किया था लेकिन जैसे हमारे यहां आम लोगो को न्याय नही मिलता ऐसे ही अमेरिका में भी आम लोगो की इन दानव कंपनियों के सामने एक भी नही चलती.

आमतौर पर लोग अमेरिका को ही मानवता का हत्यारा समझते हैं जबकि अमेरिका की DuPont जैसी मात्र एक कम्पनी क्या क्या करती है व क्या क्या कर सकती है उसके बारे में जानकर ही सोचने पर मजबूर हो जाना पड़ता है. अमेरिका में DuPont जैसी ही सैकड़ों-हजारों कंपनियां हैं जो मनुष्यों के खून का व्यापार करके अपनी जेबें भरती हैं और आजतक उनपर कोई भी लगाम नहीं लगा पाया. वहीं आजकल हमारे देश में ऐसे लोगों की सरकार आ गयी है जो इन कम्पनियों के लिए पलक पांवड़े बिछाए बैठे हैं बिना इसकी जानकारी के कि विदेशी कम्पनियां हमारे देश का विकास करने नही अपने लाभ के लिए आती हैं. ये देश ईस्ट इण्डिया कम्पनी और उसके शैतानी साम्राज्य को झेल चुका है फिर भी भारत सरकारों को लगता है कि, विदेशी कंपनियों को बुलाकर वह भारत निर्माण कर लेंगे.