HAARP – High Frequency Active Auroral Research Program

पिछले कुछ दशकों से दुनिया ने कई बड़े बदलाव देखे हैं. ना ही मात्र दुनिया के सोचने का नजरिया बदला है बल्कि प्रकृति और प्राकृतिक क्रियाकलापों में भी भारी बदलाव आया है. बादल फटने जैसी नयी-नयी प्राकृतिक आपदाएं तो अस्तित्त्व में आयी ही हैं इसके साथ ही मौसम चक्र में भी भारी बदलाव आये हैं. सूखे जैसी स्थितियां तो वर्तमान में आम हो गयी है.

HAARP (हार्प) : ऐसा आविष्कार जिसके जरिये लाया जा सकता मौसमों में बदलाव
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विज्ञान इतना आगे निकल चुका है कि अब बारिश करवाना हो या बारिश रोकना हो या फिर किसी स्थान पर बर्फ पड़वाना हो यह सब आम हो गया है. इन सब के पीछे जो तकनीकि कार्य करती है वह आज हमारी सोच से कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी है. आज हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही एक तकनीकि हार्प के बारे में :

HAARP क्या है

हार्प यानी ‘हाई फ्रीक्वेंसी एक्टिव एरोरल रिसर्च प्रोग्राम’ 1993 में अमेरिकी वायुसेना, नौसेना, अलास्का विश्वविद्यालय, अमेरिकन डिफेन्स रिसर्च संस्थान एवं दुनियाभर के अमेरिका में काम करने वाले वैज्ञानिकों के संयुक्त अभियान द्वारा अलास्का के गाकोन में बनाया गया एक ऐसा वैज्ञानिक प्रोग्राम हैं जिसे धरती के आयनमंडल पर शोध करने के लिए स्थापित किया गया था.

आयनमंडल क्या होता है

पृथ्वी से लगभग 8० किलोमीटर के बाद का सम्पूर्ण वायुमंडल आयनमंडल कहलाता है व पृथ्वी से प्रेषित होने वाली सभी रेडियो तरंगे इसी मंडल से परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर लौट जाती हैं, हम शुरू से ही विज्ञान की किताबों में पढ़ते आये हैं कि आयनमंडल की उपयोगिता रेडियो तरंगो (विद्युत् चुम्बकीय तरंगो) के प्रसारण में सबसे अधिक मानी जाती है. धरती पर परिवर्तित होने वाले मौसमों एवं सूर्य से धरती पर आने वाली धूप की तीव्रता में भी आयनमंडल की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है. अगर आयनमंडल पर कोई प्रभाव पड़े तो उसका सीधा असर धरती पर होता है. अगर आयनमंडल पर नियंत्रण पा लिया जाय तो पृथ्वी पर भारी बदलाव लाये जा सकते हैं जो कि अब संभव हो गया है.

HAARP कैसे काम करता है

दरअसल हार्प को अस्तित्व में लाने वाले वैज्ञानिकों ने पहले प्रकृति को समझा व प्रकृति कैसे काम करती है इस विषय पर गहन शोध करने के बाद उन्होंने ऐसे-ऐसे साधन विकसित किये जो बिलकुल प्रकृति की तरह ही काम करते है बस अंतर है तो समय का क्योंकि प्रकृति हर कार्य अपने समय पर ही करती है अचानक कुछ भी नही लेकिन हार्प द्वारा किसी भी समय किसी भी मौसम में कुछ भी किया जा सकता है. भूकंप, बारिश, सूखा या फिर चक्रवात यह सब हार्प की सहायता से लाये जा सकते हैं.

अगर वैज्ञानिक रूप से कहा जाय तो ‘HAARP उच्च छमता वाले उर्जा संयोजन केंद्र है जिसे संचयित करने के लिए हार्प संस्थान में बड़े-बड़े इलेक्ट्रो मैग्नेटिक टावर व एंटीना (arrey) लगाये गये हैं जहां पर हार्प विज्ञानी  ‘विद्युत् चुम्बकीय ऊर्जा’ (Electro Magnetic Energy) का भंडारण करके उसे आवश्यकतानुसार कहीं पर भी छोड़ा जा सकता है.

इस तकनीकि में विद्युत् चुंबकीय तरंगें वायुमंडल के आयनमंडल वाले हिस्से में छोड़ी जाती है जिससे आयनमंडल का एक सीमित हिस्सा नियंत्रित किया जा सकता है. फिर एक सीमित क्षेत्र में आयनमंडल पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद उससे मनचाहा काम लिया जा सकता है जैसे : बारिश करवाना, लगातार बारिश करवाकर बाढ़ लाना व बादलों में उपस्थित वाष्प को सोखकर सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न करना.

HAARP (हार्प) : ऐसा आविष्कार जिसके जरिये लाया जा सकता मौसमों में बदलाव
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इस प्रकार से मौसमों में मनचाहा परिवर्तन किया जा सकता हैं. प्रकृति से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की जा सकती है. कहीं पे कभी भी बारिश करवाई जा सकती है. बारिश रुकवाई जा सकती है. बाढ़ व सूखे जैसे हालात पैदा किये जा सकते हैं. कहीं पर बर्फ गिरवा सकते हैं रुकवा सकते हैं. भीषण चक्रवात, भूकम्प व सुनामी लाई जा सकती है अर्थात अगर संक्षेप में कहा जाय तो इसी तरह की अन्य प्राकृतिक क्रियाकलापों को वैज्ञानिकों ने अब अंजाम देना बखूबी सीख लिया है.

रूस की सेना द्वारा प्रकाशित किये जाने वाले एक जर्नल ने यहाँ तक दावा किया था कि, HAARP के आयनमंडल परीक्षण के द्वारा भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉन्स के झरने बहाकर धरती के चुंबकीय ध्रुवों को भी झटका दिया जा सकता है.

अलास्का के सीनेटर रहे Mark Begich के भाई Nick Begich Jr. के अनुसार, हार्प का प्रयोग ना ही मात्र भूकंप लाने के लिए किया जा सकता है बल्कि इसका प्रयोग लोगों के दिमाग को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है.

निकोला टेस्ला की तकनीकि का प्रयोग

हार्प तकनीकि विज्ञान के जिन नियमों पर कार्य करती है उसका सबसे पहले अविष्कार धरती के सबसे महान वैज्ञानिकों में शुमार किये जाने वाले निकोला टेस्ला ने सन 1900 के आसपास किया था. उन्होंने एक Mechanical Osscilator भी बनाया था जो वाइब्रेशन तकनीकि पर चलता था तथा उसकी फ्रीक्वेंसी शक्ति इतनी ज्यादा थी कि उससे भूकम्प तक लाया जा सकता था. कहा जाता है टेस्ला का उस आविष्कार जैसा ही कुछ हार्प वैज्ञानिकों के पास भी है जिसे अपग्रेड करके उन्होंने बड़े लेवल पर ऐसे Osscilator बनाये जिससे किसी भी स्थान पर भूकम्प व सुनामी लायी जा सकती है.

भारत जैसे तीसरी दुनिया के देश का इस्तेमाल पिछले कई वर्षों से गिनी पिग के रूप में किया जा रहा है. नई दवाइयों या बीमारियों की टेस्टिंग हो या फिर किसी Vaccination का परीक्षण करना हो उसका इस्तेमाल भारतीयों पर किया जाता रहा है. पूर्व पर्यावरण मंत्री रहे अनिल माधव दवे ने संसद में दिए गये अपने एक बयान में दावा किया था कि, भारत में असमी होने वाले परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के लिए हार्प जिम्मेदार है. अनिल माधव दवे की मृत्यु भी रहस्यमय परिस्थितियों में हो गयी थी जिसके कारणों का खुलासा आज भी नहीं हो सका है.