अभिव्यक्ति की आजादी और मनोरंजन के नाम पर हिन्दू धर्म हमेशा से ही मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री का टारगेट रहा है. ज्यादातर फिल्म निर्माता हमेशा से ही एंटी हिन्दू और प्रो-अब्राह्मिक (ईसाई-मुस्लिम-यहूदी समर्थक) रहे हैं पर पिछले कुछ समय से फिल्म इंडस्ट्री में हिन्दू विरोध कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है.

क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है कि, आखिर उसका कारण क्या है ? दरअसल पहले फिल्म इंडस्ट्री में पैसा सिर्फ Jesuit Mission (ईसाई संगठनों) से ही आता था और ईसाईयत का ही प्रचार होता था (हल्का फुल्का इस्लाम का भी क्योंकि बॉलीवुड में काम करने वाले लोग मुस्लिम और वामपंथी ही होते थे) पर अब Jihad अर्थात अरब का भी काफी पैसा फिल्मों में लगने लगा है.

फिल्म जगत के वर्तमान माहौल को देखें तो इसका अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि, बॉलीवुड और फिल्म इंडस्ट्री में ईसाई ताकतों के साथ ही जिहादी ताकतें भी जमकर निवेश कर रही हैं. आजकल फिल्म इंडस्ट्री Jesuit + Jihad दोनों एजेंडे पर एक साथ काम कर रही है.

इन ताकतों से बॉलीवुड में पैसा सीधे किसी माध्यम से आने के बजाय उन भारतीय एंटरटेनमेंट कंपनियों के जरिये आता है जो फिल्मों का निर्माण करती हैं. अर्थात नाम इन एंटरटेनमेंट कंपनियों का होता है लेकिन मिशन किसी और का. दाऊद इब्राहीम जैसे माफिया भी इसी तरह एंटरटेनमेंट कंपनियों के माध्यम से फिल्मों में पैसा लगाते हैं.

यही कारण है कि, हिन्दुओं के विरोध में, हिन्दू देवी देवताओं के विरोध में और हिन्दू रीति-रिवाजों के विरोध में आजकल पूरी फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया काम कर रही है. एक तरह से कहा जाय तो सब पैसे का खेल है जिसके आगे सभी ने घुटने टेक रखे हैं.

यह एक तथ्य है कि, इस दुनिया के अधिकतर गंदे खेल पैसे के लिए ही होते हैं, कोई भी जानबूझकर किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहता लेकिन पैसा ऐसी चीज है उसके आगे अच्छे-अच्छे इंसान अपना चरित्र भूल जाते हैं. फिल्म इंडस्ट्री तो खैर चरित्रहीन और धंधेबाजों की ही इंडस्ट्री है. पैसा ही वह कारण है जिसके चलते बॉलीवुड निर्माता निर्देशक हिंदुओं की भावनाओं के साथ खेलते हैं.

यही लोग जो फिल्मों में पैसा लगाते हैं यही लोग नेताओं और राजनीतिक पार्टियों को भी चंदा देते हैं जिसके चलते चाहे जो भी सरकार हो फिल्मों और हिन्दू विरोधी साहित्यों पर कोई कभी रोक नहीं लगा पाता. हिन्दुओं को नीचा दिखाने की इस साजिश में, Jihadi और Jesuits ताकतों के साथ ही बॉलीवुड इंडस्ट्री के ही कलाकार-बिजनेसमैन और नेताओं का नेक्सस काम करता है. जिसके कारण हर चीजें आराम से चलती रहती हैं,

समाधान क्या है 

ऐसा कई मौकों पर होता है जब भी हिन्दुओं के विरोध में कोई फिल्म या सीरियल आता है तो हिन्दू सोशल मीडिया या फिर यहाँ वहां विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा उतार लेते हैं जो कि ना ही मात्र असमर्थता की निशानी है बल्कि एक तरह से खुद को पीड़ित के रूप में पेश करना भी है. इससे हिन्दू विरोधी फिल्म इंडस्ट्री का कुछ नुकसान तो होने से रहा बल्कि इस तरीके से फिल्म सीरियलों का का बेहतरीन तरीके से मुफ्त में प्रचार भी हो जाता है.

जिसका परिणाम यह निकलता है कि, ऐसी फ़िल्में सुपर हिट जाती हैं और फिल्म निर्माता इसे अपनी विजय समझते हैं और उन्हें ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन भी मिलता है. इसके साथ ही वो असामाजिक तत्त्व भी मोटा माल कमा जाते हैं जिनका धर्म सिर्फ पैसा है. वो चाहे हिन्दुओं की भावनाओं को ठोस पहुंचाकर ही क्यों ना हो. इस धंधे में ऐसा नहीं है कि सिर्फ गैर हिन्दू ही सम्मिलित हैं बल्कि बड़े पैमाने पर इस व्यापार में हिन्दू धनपशु भे सम्मिलित हैं जिनका धर्म सिर्फ पैसा है. जो पैसा बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं.

हिंदुओं को वास्तव में अगर Jihad + Jesuit एजेंडे से लड़ना है तो उन्हें चाहिए कि वो जाहिलों की तरह ऊल-जुलूल हरकतें करने के बजाय बॉलीवुड और फिल्म जगत के समकक्ष अपना सिनेमा खड़ा करें और सिर्फ वो दिखाएँ जो दिखाना चाहते हैं. आये दिन फिल्मों के खिलाफ ऐसा ओछा विरोध करके ना ही मात्र वे अपनी असमर्थता का प्रमाण देते हैं बल्कि अपनी कमजोरी की भी पोल खोलकर रख देते हैं. बॉलीवुड कलाकारों को लोग अक्सर हिन्दू समर्थक, राष्ट्रवादी या देशद्रोही की श्रेणी में बांटते हैं जबकि वास्तविकता में इस पूरी इंडस्ट्री का एक ही धर्म है एक ही चरित्र है ‘पैसा’ वो पैसा बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं .

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