आजकल ये नाम काफी सुनने को मिलता है. दुनिया भर के कई विद्वान पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान को लेकर हुयी चमत्कारिक तरक्की एवं दुनिया की ज्यादातर समस्याओं के लिए काफी हद तक ‘इल्लुमिनाती’ को जिम्मेदार मानते हैं. हालाँकि इल्लुमिनाती या इससे जुड़े प्रभावों को मानने वालों की संख्या काफी नगण्य है. ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो  इसे Conspiracy Theorists की गप मानकर चलते हैं.

क्या है इल्लुमिनाती का रहस्य, क्या ये धरती पर राज करते हैं ?
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अगर बात करें ‘इल्लुमिनाती’ की तो इल्लुमिनाती के बारे में बताया कम बल्कि डर और भ्रम ज्यादा फैलाया गया है. इल्लुमिनाती को ज्यादातर लोग एक सेक्रेट सोसाइटी मानते हैं. हालाँकि इल्लुमिनाती कोई सेक्रेट सोसाइटी या संस्था नहीं है और ना ही इससे प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े लोगों की कोई सूची उपलब्ध है.

वास्तव में इल्लुमिनाती किसी सेक्रेट सोसाइटी का नाम नहीं बल्कि एक ‘दानवी माहौल’ का नाम है. जिसके लिए दुनिया की अनेकों संस्थाएं, ख़ुफ़िया एजेंसियां, ग्लोबल माफिया, धर्म गुरु, बैंकर्स, बिजनेसमैन,वकील, डॉक्टर, हथियार निर्माता, मीडिया घराने, लेखक, फिल्म जगत, नेता, डिप्लोमैट, खिलाड़ी, सेलिब्रिटीज, बड़े-बड़े ठग-लुटेरे एवं कत्ल करने में माहिर लोगों सहित लगभग हर पेशे से जुड़े लोग काम करते हैं.

Illuminati शब्द लैटिन के Illuminatio से लिया गया है. Illuminati = Illumination अर्थात प्रकाशित (ज्ञात हो कि हमारे देश भारत का अर्थ भी ‘प्रकाशित’ ही होता है) लेकिन फर्क यह है कि Illuminati दानवी शक्तियों का प्रकाश है और भारत दैवीय शक्तियों का.

एंजेल्स एंड डेमांस जैसी हॉलीवुड फिल्मों में इल्लुमिनाती के बारे में काफी कुछ बताया गया है. इस फिल्म की माने तो आधुनिक विज्ञान के पीछे इल्लुमिनाती से जुड़े लोगों का हाथ है. महान लेखक Dan Brown जैसे ज्यादातर विद्वान इल्लुमिनाती को वैज्ञानिकों की ही गुप्त संस्था मानते हैं.

Dan Brown अपने उपन्यास में बताते हैं, इल्लुमिनाती के लिए कार्य रहे लोगों का मुख्य लक्ष्य हमेशा से ही प्राचीन संस्कृतियों को समाप्त कर विज्ञान को ही धर्म के रूप में स्थापित करना रहा है. एंजेल्स एंड ड़ेमोंस में जो की Dan Brown के उपन्यास पर ही आधारित है उसमें बताया गया है कि, महान वैज्ञानिक गैलीलियो भी एक इल्लुमिनाती थे जो चर्च के पाखंडो के विपरीत विज्ञान और तर्क को स्थापित करने में लगे थे.

ना ही मात्र गैलीलियो बल्कि न्यूटन, चार्ल्स डार्विन, फ्रांसिस बेकन, विलियम शेक्सपीयर, रॉकफेलर, रोथसचाइल्ड, कार्ल मार्क्स, एडम वेईशप्ट और दुनिया भर में फैले फ्रीमैसन जैसे ज्यादातर वे लोग जिन्होंने दुनिया के सोचने का नजरिया बदल डाला ये सब इल्लुमिनाती के लिए काम करने वाले लोगों की प्राथमिक श्रेणी में गिने जाते हैं.

चूँकि भारत जैसे देश धर्म और अध्यात्म की धरती रहे हैं जहाँ भौतिकतावाद की कोई जगह नहीं रही है इसलिए कहा जाता है की भारत की आत्मा को समाप्त कर यहाँ की एक एक चीज को बदल देना इल्लुमिनाती के मुख्य लक्ष्यों में से एक रहा है क्योंकि विज्ञान अर्थात इल्लुमिनाती अध्यात्म और प्राचीन संस्कृतियों का घोर विरोधी है. अपने इस लक्ष्य के लिए वे लोग सैकड़ों वर्षों से कार्यरत हैं और काफी हद तक सफल भी हो चुके हैं.

दानवी शक्तियों ने लगभग पूरी दुनिया में कब्जा जमाया और हर जगह सफलता प्राप्त की, आस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में करोड़ों लोगों का नरसंहार किया और वहां के मूलनिवासियों का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया क्योंकि वो ऐसे लोग थे जो इल्लुमिनाती के वैज्ञानिक समाज में फिट नहीं बैठते थे. यही कारण है कि, कुछ लाख यहूदियों के नरसंहार की चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है लेकिन करोड़ों आदिवासियों के नरसंहार के बारे में कोई बात तक करना नहीं पसंद करता.

क्या है इल्लुमिनाती, क्या ये धरती पर राज करते हैं ?
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अगर कारण पता किया जाय कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया तो सब कुछ साफ़ हो जाता है. लेकिन वो भारत के साथ ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि भारत की बाजुएँ इतनी मजबूत थीं कि आमने सामने की लड़ाई में इस धरती पर कोई उनसे नहीं टकरा सकता था. भारतीय धर्म और अध्यात्म के साथ ही विज्ञान का भी अद्भुत संगम थे. जबकि भारत में भी करोड़ों लोगों का मात्र ब्रिटिशकाल में ही नरसंहार हो गया था फिर भी आजतक वे कभी भारत की रीढ़ नहीं तोड़ पाए.

इस कारण दानवी शक्तियों ने नई ‘स्ट्रेटेजी’ अपनाई. तरह तरह की युक्तियाँ लगाकर भारत को बर्बाद करने की. ब्रिटिश और यूरोपीय आक्रांता भी एक ख़ास साजिश के तहत भारत आये. अगर उन्हें भारत को मात्र लूटना होता या भारत के संसाधनों का दोहन करना होता तो वे कभी भी भारत की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते. बल्कि लूट मार करके चले जाते.

लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया बल्कि एक तरह से वे अपना एजेंडा पहले से ही सेट करके आये थे. एक साजिश के तहत उन्होंने भारत की संस्कृति खत्म की, शिक्षा व्यवस्था खत्म की, गरीबी भुखमरी को जन्म दिया, भारत के उद्दोग धंधे बर्बाद किये, इतिहास खत्म किया, फर्जी इतिहास प्लांट किया, बॉलीवुड, क्रिकेट, शोषणकारी बैंकिंग एवं मुद्रा प्रणाली, लोकतंत्र व चुनावी नाटक, हिन्दुओं-मुस्लिमों को बांटने जैसे कई ऐसे कार्य किये जिससे भारत अगले सैकड़ों वर्षों में भी ना उबर सके.

इस शैतानी सिस्टम की ही देन है की, कुकुरमुत्तो की भांति समाजसेवा के नाम पर भारत में हर साल हजारों नेता उग आते हैं और समाज सेवा की शपथ लेकर हजारों लोग अधिकारी बनते हैं लेकिन देश दिन पर दिन गर्त में ही जा रहा है. शिक्षा प्रणाली किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है लेकिन भारतीयों की जड़ों में मट्ठा डालकर उन्हें इन सब व्यर्थ की चीजों में ऐसा व्यस्त कर दिया गया की भारतीय उससे आगे का कभी सोच ही नहीं सकते.

सोचने वाली बात है जो लोग मुफ्त में किसी को अपना बुखार नहीं देते आज वो दुनिया को अपनी टेक्नोलॉजी दिए जा रहे हैं. फ्री में दुनिया को पोर्न दिया जा रहा है. गरीब देशों को मदद दी जा रही है. जो देश रोटी जुटाने में और रोजगार जुटाने में भी अक्षम हैं उन्हें खरबों के हथियार दिए जा रहे हैं.

हैरानी की बात यह है कि, जिन लोगों की दो वक्त की रोटी जुटाने की ताकत नहीं वो आज एके 47 और स्वचालित हथियार प्रयोग कर रहे हैं. हम इसे ‘इल्लुमिनाती’ का प्रभाव कहें या कुछ और लेकिन यह तो स्वीकारना ही होगा कि आज दुनिया ‘दानवी शक्तियों’ की जद में है जिसने मानव जाति को अपना गुलाम बना लिया है.

हमारा खान-पान, रहन-सहन, जीने का तरीका सब बदल गया है. हमारे जीवन में मशीनों ने चमत्कारिक रूप से ऐसी घुसपैठ कर ली है कि हमें मानवों से ज्यादा मशीनों व गैजेटो से प्रेम हो गया है जहां हम पहले जिया करते थे वहीं अब हमारा जीवन नोट कमाने में सीमित रह गया है और जितना कमाओ उतना ही कम.

गरीब तो खाने के लिए कमाता ही है जबकि अमीर और अमीर होने के लिए कमाता है. जिस चक्कर में ना गरीब अपना जीवन जी पाता है ना अमीर. रोटी कपड़ा और मकान ऐसी चीजें हैं जिसे प्रकृति ने पूरे प्राणी जगत को प्रदान किया हुआ है. फिर भी ये देखना बेहद हास्यास्पद है कि, धरती पर गुजर बसर करने के लिए मनुष्यों को उसका मूल्य चुकाना पड़ता है जबकि धरती का कोई जानवर भी ये काम नहीं करता क्योंकि प्रकृति ने सबके लिए व्यवस्था कर रखी है.

क्या है इल्लुमिनाती, क्या ये धरती पर राज करते हैं ?

प्रकृति ने हर एक प्राणी के लिए धरती पर कुछ ना कुछ दे रखा है यही कारण है कि, इस धरा पर कोई भी जीव भूखा नहीं मरता सिवाय मनुष्य के, धरती पर कोई भी जीव खाने के लिए पैसे नहीं कमाता और ना ही घर बनाने के लिए मिटटी खरीदता है. दुनिया का परिदृश्य ऐसा बदल दिया गया है लोग कुछ भी सोचने लायक नहीं बचे हैं. मानव सभ्यता की हर चीज पैसे पर आकर टिक गयी है और इससे ज्यादा महत्त्वपूर्ण उसके लिए कुछ नहीं रह गया है.

अपने देश का ही उदाहरण लें. हमारा देश ऐसे देशों में आता था जो भोगवाद या उपभोक्तावाद के मायाजाल में फंसाने के के बजाय जीवन जीने की कला सिखाता था लेकिन आज हम भी अन्य की तरह वही कर रहे हैं जो हमसे कोई करवाना चाहता था.

पर आज भी हमें पता नहीं है हमारे भीतर चल क्या रहा है, हम कहाँ जा रहे हैं ? आज दुनिया का हर देश नियमों में बंधा है, कि वो सिर्फ ये कर सकता है इससे ज्यादा नहीं. अगर कोई देश अपनी मनमर्जी करता है या इन शक्तियों की राह में बाधा बनता है तो उसका क्या हाल होता है हम कुछ देशों को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं.

दुनिया के सबसे अमीर देश भी कर्जे में, दुनिया के सबसे गरीब देश भी कर्ज में फिर साहूकार कौन ? पहले हम कहीं भी आ जा सकते थे ना वीजा की जरूरत ना पासपोर्ट की लेकिन अब पचास तरह की कागजी कार्यवाही. आखिर किसने बांटा इस धरती को और ऐसे निरंकुश नियम-कानून स्थापित कर दिए. इन नियमों ने जन्म कहाँ से लिया और किस नियति से इन्हें बनाया गया था ? आखिर कौन से लोग हैं जिनके नियमों में दुनिया के सभी देश बंधे हुए हैं और उन नियमों के आगे मजबूर क्यों हैं ?

इसलिए निष्कर्ष रूप से कहें तो Illuminati कोई सेक्रेट सोसाइटी या ख़ुफ़िया संगठन नहीं बल्कि एक माहौल है, एक मायाजाल है, एक प्रकाश है जिसका असीमित प्रभाव आज हर मनुष्य के जीवन पर है. मात्र पिछले 200 वर्षों में इस दुनिया में और हमारे भारत में बड़े बदलाव आये हैं. जिस भारत को कोई कभी बदल नहीं सका था, ये देखना बेहद हास्यास्पद है कि, आज वह भारतीय खुद ही खुद को बदलने की अंधी रेस में आपस में ही प्रतियोगिता कर रहे हैं.