स्कूल और शिक्षा प्रणाली हैं मानसिक गुलामी का सबसे बड़ा कारण 

भारतीयों को मानसिक गुलाम बनाना बेहद आसान है. चाहे बिजनेस कंपनियों द्वारा अपना कोई प्रोडक्ट बेचना हो या फिर देश के नेताओं द्वारा उन्हें अपने झांसे में लेना हो. भारत में ये दोनों ही काम बेहद आसान है. क्योंकि भारतीयों को ब्रिटिशों द्वारा दी गयी शिक्षा प्रणाली के द्वारा उसी तरह सोचने के लिए बना दिया गया है जैसा ताकतवर लोग चाहते हैं.

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भारतीय शिक्षा प्रणाली में सिर्फ Follow करना सिखाया जाता है सोचना और Analysis करना नहीं. भारतीयों की मानसिक गुलामी की जड़ें भारतीय शिक्षा प्रणाली और स्कूलों-कालेजों में हैं. जहाँ उनके दिमाग में ही गुलामी भर दी जाती है और वो स्वतंत्र रूप से सोचने-समझने के काबिल नहीं बचते.

Geopolitics समझने की शक्ति का ना होना 

भारत में Political Game समझने वालों की कोई कमी नहीं लेकिन Geopolitical Game समझने वाले बेहद कम हैं, कारण है भारत में Geopolitics Study & Research Subject Micro Level पर है जबकि दुनिया के ताकतवर और संपन्न देशों में ये एक Subject की तरह स्कूल-कालेजों के पाठ्यक्रम में शामिल है.

यही कारण है कि, भारत की युवा और So Called Educated पीढ़ी को भी मानसिक गुलाम बनाना बेहद आसान काम है. Mind Manipulation के जरिये यह काम 1947 के बाद से ही हो रहा है. भारतीयों को उन चीजों में भरोसा रखने और उन्हें Follow करने के लिए तैयार कर लिया गया है जैसा कि भारत के दुश्मन चाहते थे.

Marketing और Advertising के झांसे में आ जाना 

भारत के के युवाओं को दिमाग किसी भी Agenda के लिए Propoganda War और Marketing के जरिये कब्जाया जा सकता है. चाहे वह अपना Product बाजार में उतारने के लिए बिजनेस के क्षेत्र में Multi Level Marketing (MLM) वाले बिजनेस हों या Network Marketing वाले या फिर Television Newspaper में आने वाले Advertising campaign, इन सबके जरिये भारतीयों को उल्लू बनाना और उन्हें झांसे में लेना बेहद आसान है.

आज के समय में यह एक कड़वी सच्चाई है, अगर भारतीयों को किसी चीज़ को बार-बार दिखाया जाय और उनका प्रस्तुतीकरण प्रभावशाली हो, भले ही वह चीजें किसी काम की ना हों या उनमें जरा भी असलियत ना हो लेकिन फिर भी भारतीयों को उस पर भरोसा करने के लिए मजबूर करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है.

भारतीयों के सोचने-समझने का यही तरीका ही वह कारण है जिसके चलते भारतीयों को Marketing और झूठे भाषणों के जरिये Political Parties और Politicians उन्हें यह सोचने के लिए तैयार कर लेते हैं कि, हिन्दू खतरे में है, मुसलमान खतरे में है, दलित खतरे में है, इस पार्टी को ना चुना तो अगली सुबह तुम्हारा अस्तित्व मिट जायेगा.

जबतक भारतीयों ने अपने सोचने का तरीका नहीं बदला तबतक ना ही भारत में कोई बदलाव आना है और ना ही देश के नेता कभी अपने वादे पूरे करेंगे.

यही स्ट्रेटेजी Businees Industry के साथ है जो भारतीयों को Advertising Campaign के जरिये इस बात को मानने के लिए तैयार कर लेती हैं कि अगर उनका Product ना लिया तो उनका जीवन खत्म हो जायेगा या हमारा  Product लिए बिना लोगों का जीवन अधूरा है.

भारतीयों की इसी मानसिक गुलामी का नतीजा है यहाँ गोरा होने वाली क्रीम का भी अरबों का बाजार है. जबकि असलियत में धरती पर ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं बना जो इंसान को गोरा कर सके और इसी तरह के ज्यादातर घटिया Quality के Product भारतीय बाजार में धड़ल्ले से रहे हैं जो उन्हीं के पैसे से उन्हीं को मार रहे हैं.

भारत की राजनीतिक पार्टियों की तरह दुनिया की लगभग हर कंपनी यह समझ चुकी है कि, भारतीय हद दर्जे के मानसिक गुलाम हैं जिन्हें अपना सामान बेचना बेहद आसान है.

घटिया सरकार प्रणाली और राजनीतिक व्यवस्था

खतरनाक यह है कि, सरकार इस धोखेबाज प्रणाली का एक हिस्सा है जो इस मानसिक गुलामी में Industry और Politics दोनों का ही साथ देती है जिस कारण भारत में कुछ भी उल्टा-सीधा खेल करना बेहद आसान है. उससे भी बड़ी समस्या है भारतीयों का यह अँधा विश्वास कि, सरकारें उनके लिए होती हैं जबकि वास्तविकता में ये उन्हें Control करने के लिए होती हैं चाहे वह जिस पार्टी की हों.

भारतीयों को किसी प्रकार का नुकसान हो या फिर उन्हें आर्थिक रूप से चोट पहुंचे इससे भारतीय सरकारों को कोई मतलब नहीं होता उन्हें सिर्फ टैक्स के रूप में मिलने वाले पैसे से मतलब होता है. यही कारण है कि, भारत में खाने-पीने के प्रोडक्ट धरती पर सबसे घटिया Quality के चल रहे हैं और सरकार उनपर रोक लगाना तो दूर उसका संज्ञान तक नहीं लेती. शराब-गुटखा और खतरनाक दवाइयां भी ऐसी ही चीजें हैं जो सरकार के संरक्षण में धड़ल्ले से चल रहे हैं.

इसलिए अगर आप सोचते हैं कि, सरकार आपके लिए होती है और आप अपनी किसी पसंदीदा पार्टी की सरकार ले आते हैं तो उससे आपका फायदा होगा तो ये मात्र आपका भ्रम है. भारतीय सरकारें और राजनीतिक पार्टियाँ किसी की भी सगी नहीं हैं.

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