भारत के लिए करेंसी प्रिंटिंग का काम देखने वाले रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया को लेकर हाल ही में एक चौंका देने वाला खुलासा सामने आया है। एक आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक के पास यह प्रमाणित करने का कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है कि नोटबंदी के बाद उसके पास 2,000 रुपये और 200 रुपये के नए नोट जारी करने का अधिकार था। मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता एम.एस. रॉय के अनुसार, ‘आरबीआई के जवाब के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने 200 रुपये और 2,000 रुपये के नोट जारी करने की तिथि तक कोई भी सरकारी प्रस्ताव या परिपत्र प्रकाशित नहीं किया था।’

RBI के पास नहीं था 2,000 और 200 के नोट छापने का अधिकार
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नोटबंदी से लगभग छह महीने पहले 19 मई, 2016 का एक दस्तावेज दिखाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक द्वारा 18 मई, 2016 को पेश किए गए प्रस्ताव को केंद्रीय निदेशक मंडल ने मंजूरी दे दी थी। यह प्रस्ताव नए बैंक नोटों के डिजाइन, पैमाने और मूल्यों से संबंधित था, जिसे बोर्ड ने कुछ ही मिनटों में मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया था। इस तरह का प्रस्ताव पहले 8 जुलाई, 1993 को भी तत्कालीन सरकार के पास भेजा गया था, जिसमें 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये के आकार को कम कर नए भारतीय बैंक नोटों के एक नए ‘परिवार’ को शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था।

आरबीआई के मुंबई स्थित हेडक्वॉर्टर से भेजे गए एक ज्ञापन के मुताबिक 15 जुलाई, 1993 को निदेशक मंडल की एक बैठक में पुराने प्रस्ताव (8 जुलाई, 1993) को मंजूरी दी गई थी, जिस पर तत्कालीन कार्यकारी निदेशक ए.पी. अय्यर के हस्ताक्षर थे। रॉय ने 27 फरवरी, 2017 को एक अलग आरटीआई भी दायर की थी, जिसमें एक रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर मुद्रित न किए जाने के बारे में दस्तावेज मांगे गए थे, जबकि 5 रुपये से लेकर 2,000 तक के सभी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर मुद्रित की जा रही है।

इस विशेष प्रश्न के जवाब में आरबीआई ने 15 जुलाई, 1993, 13 जुलाई, 1994 और 19 मई, 2016 को हुई बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्ताव की प्रतियां मुहैया कराईं। हालांकि, ये प्रस्ताव केवल 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये के लिए डिजाइन फीचर के बारे में बताते हैं, जिन पर राष्ट्रपिता की तस्वीर मुद्रित हैं। आरटीआई पर मिले जवाब में आरबीआई बोर्ड के प्रस्ताव के अंदर 1,000, 2,000 रुपये और हाल ही में जारी 200 रुपये के नोट के डिजाइन की विशेषताओं या महात्मा गांधी की तस्वीर के बारे में कोई संदर्भ मौजूद नहीं है।

‘बिना मंजूरी कैसे डिजाइन हुए और छपे नए नोट’

आरटीआई कार्यकर्ता एम.एस. रॉय ने कहा कि यदि आरबीआई बोर्ड के प्रस्तावों में डिजाइन या 1000 रुपये में (नोटबंदी के बाद चलन में नहीं) 2,000 रुपये और बाद में 200 रुपये के नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीरों को छापने पर कोई चर्चा नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि इसके लिए किसी तरह की आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इन नोटों को जारी करने के लिए कोई मंजूरी नहीं दी गई, तो इन नोटों को किसने डिजाइन, मुद्रण, वितरण और अधिकृत किया।

‘2,000 के नोटों की कानूनी वैधता पर प्रश्नचिह्न’

आरटीआई दाखिल करने वाले रॉय का कहना है कि, ‘यदि आरबीआई बोर्ड ने सार्वजनिक डोमेन में किसी भी तरह की कोई मंजूरी नहीं दी और ना ही कोई समर्थन जीआर या कोई अन्य ज्ञात दस्तावेज मौजूद नहीं है, तो यह इन नोटों की कानूनी वैधता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। साथ ही यह 200 और 2,000 रुपये के नोटों की आधिकारिक स्थिति पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।’

स्रोत : इकनॉमिक टाइम्स  

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