‘The Sassoon Family’ जिन्हें Rothschild Of The East भी कहा जाता है अर्थात ‘पूर्व के रोथ्सचाइल्ड.’ Sassoon Family के बारे में कम ही लोग जानते हैं क्योंकि ये भी Rothschild की तरह ही लो प्रोफाइल रहकर अपना साम्राज्य चलाते आये हैं. Sassoon Family की सदियों से दुनिया के सबसे अमीर प्राचीन घरानों में गिनती होती रही है. ये जहां भी गए वहां अपना आर्थिक साम्राज्य फैलाया. अपने सुव्यवस्थित काले कारनामो (Slave Trade & Drug Cartels) से इन्हें किसी भी स्थान पर ‘अमीर’ बनने में ज्यादा समय नही लगता था.

Sassoon Family : पूर्व के Rothschild जो थे इतिहास के सबसे बड़े अफीम तस्कर
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Sassoon Family की जड़ें बगदाद  (ईराक) में हैं. ये बगदादी मूल के यहूदी हैं. इनका मुख्य कार्य बैंकर्स यहूदियों की तरह हमेशा ‘अर्थतंत्र’ के इर्द गिर्द ही रहा करता था. इसलिए इन्हें जहां जहां अपने व्यापार में फायदा दिखता था ये वहां पलायन कर जाते थे. इनकी गलत और शोषणकारी नीतियों की वजह से अक्सर कई जगह से इन्हें खदेड़ा भी जाता रहा है. जिस कारण ये जगह जगह भागते व बसते रहे हैं.

ये जब बगदाद में थे तो बगदाद में ‘पाशा’ लोगों का शासन हुआ करता था. बगदाद में Sassoons पाशा शासकों का राजस्व विभाग (Revenue Department) सम्भाला करते थे व पाशाओं के Chief Treasurer हुआ करते थे. जिस कारण बगदाद की सत्ता पर भी अप्रत्यक्ष रूप से इनका काफी प्रभाव हुआ करता था. इसी तरह जब मुस्लिमों ने आक्रमण करके स्पेन पुर्तगाल व कई पश्चिमी यूरोप के देशो पर कब्जा किया था तब इन्होंने अपना व्यापार वहां भी बढ़ा लिया था और एक दिन उस क्षेत्र अल-अंदालुस (आज का स्पेन-पुर्तगाल व पश्चिमी यूरोप) के सबसे अमीर परिवार बन गए थे.

इसी तरह जब यूरोपियन साम्राज्यवादियों ने भारत चीन पर कब्जा जमाना शुरू किया तो नए मौके व Buisness Opportunities देखकर Sassoon Family लगभग 1830-40 के आसपास यहां भी आ पहुंचे. पूर्व में (भारत-चीन) आने के बाद इन्होंने ‘अफीम कारोबार’ से यहां भी अपने काले व्यापार की शुरुआत की और अफीम व ड्रग कारोबार बाद में भी इनका मुख्य धंधा रहा.

माना जाता है आज जो हांगकांग एक अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक शहर के रूप में चमकता है. दरअसल उसे कभी Sassoon’s Drug Center के रूप में जाना जाता था. हांगकांग शहर की नींव एक तरह से ड्रग व अफीम कारोबार से ही पड़ी थी लेकिन धीरे धीरे इन्होंने कई क्षेत्रों में हाथ डालना शुरू किया, जैसे – शिपिंग (पानी के जहाज बनाना), रियल स्टेट, बैंकिंग, Slave Trading (मानव तस्करी), सोने-हीरे-चाँदी की तस्करी, भारत से बहुमूल्य वस्तुएं चुराकर यूरोप में महंगे दामो पर बेचना, इसी तरह के अनगिनत काले कारनामो के कारण इन्हें अमीर बनने में ज्यादा समय नही लगता था और सत्ता का वरदहस्त हासिल करने में भी ज्यादा समस्या नही आती थी.

यहां ये जानना बेहद जरूरी है कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत में ब्रिटिश राजपरिवार के लिए नही बल्कि Rothschild Family और कुछ व्यापारिक परिवारों के लिए काम करती थी और अंग्रेज खुद कोई शासक (Ruler) नही बल्कि भाड़े पर लिए गये नौकर थे (एक तरह से Rothschild द्वारा फैलाये गए कारोबार के सिक्यूरिटी गार्ड) जिन्हें Rothschild और उनके Sassoon Family जैसे रिश्तेदारों द्वारा अपना काम निकलवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

Sassoon Family : पूर्व के Rothschild जो थे इतिहास के सबसे बड़े अफीम तस्कर
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ज्ञात हो कि, Sassoons दुनिया के उन गिने चुने यहूदी परिवारों में से एक हैं जिनके Rothschild Family से वैवाहिक संबंध हुआ करते थे. 18वीं शताब्दी के मध्य में जो अफीम युद्ध (Opium War) हुए थे चीन में जिसे Sino-English War (चीनी-अंग्रेज युद्ध) के नाम से भी जाना जाता है उसके पीछे ब्रिटिश राजपरिवार के साथ ही Sassoon Family का भी हाथ था. तत्कालीन चीनी शासक भारत से चीन ले जाई जाने वाली अफीम को चीन में बेचने के विरुद्ध थे जबकि अफीम माफिया परिवार अफीम की चीन में लगातार सप्लाई करना चाहते थे. अंततः इन युद्धों में अंग्रेजों को (Sassoon Family) को विजय प्राप्त हुयी थी और Sassoon Family का अफीम कारोबार लगातार चलता रहा.

उस समय इस तरह के भारत चीन में हुए ज्यादातर युद्धों व नरसंहारों के पीछे वास्तव में इन्ही लोगों की व्यापारिक महत्त्वाकांछायें थीं जिसकी परिणति बाद में इन देशों की गुलामी के रूप में हुयी. कारण भारत-चीन में इतना ज्यादा माल था जिसे इकट्ठा करना फिर अपने ठिकानों पर ले जाना आसान काम नही था इसीलिए इतना लम्बा वक्त मात्र उन्हें लूटने में लग गया.

इस तरह भारत-चीन व पूर्वी एशिया में साम्राज्यवाद की आड़ में अंग्रेजों को सिक्यूरिटी गार्ड बनाकर Rothschild & Sassoon Family ने अपना कारोबार फैलाया और इन देशों को लूटने-चूसने के लिए वर्षों तक गुलाम बनाये रखा. अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले क्रांतिकारी व स्वतन्त्रता सेनानियों को कभी सफलता इसी कारण नही मिली क्योंकि उन्हें असली दुश्मनों के बारे में कभी पता ही नहीं चल पाया और चला भी तो ज्यादातर वो हमेशा अंग्रेजों में ही उलझे रहे या मार दिये गए.

Rothschild के सहयोगी के तौर पर पूर्व में उभरे Sassoon Family ने भारत चीन में भी अपना मुख्य अड्डा आर्थिक नगरों को ही बनाया. उदाहरण स्वरूप चीन में शंघाई व हांगकांग को तथा भारत में मुम्बई, कलकत्ता व पुणे को. शंघाई व मुम्बई में Sassoon Family का आज भी कारोबार है. मुम्बई के पहले Commercial Dock को आज भी Sassoon Dock नाम से ही जाना जाता है. इसी तरह के कई institutions Sassoons ने मुम्बई में बनवाये थे. जैसे Sassoon Dock, Sassoon Schools, Sassoon Library, Sassoon Dispensary, Sassoon Guest House, Indian Jewish Federation.

इसी तरह शंघाई में बीचो-बीच आज भी Sassoon House स्थित है, इसके अलावा पुणे में Sassoon Family के प्रमुख रहे David Sassoon का मकबरा भी है. भारत से अंग्रेजों से सत्ता समेटने के कुछ समय पहले ही Sassoons, Rothschild’s owned City ‘लंदन’ पलायन कर गए थे और इजराइल निर्माण के पश्चात् 1970 में अपनी धरती इजराइल लौट गए.